सुर, साधना और संस्कार का संगम – पंडित गौतम काले

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जन्मदिवस विशेष” की इस श्रृंखला में मैं आपको आज मिलवाऊँगी प्रतिभाशाली और ख्याति प्राप्त शास्त्रीय गायक पंडित गौतम काले जी से!

मेवाती घराने के प्रतिनिधि… और संगीत मार्तंड पंडित जसराज जी के सान्निध्य में निखरे हुए शिष्य। पंडित गौतम काले इंदौर, मध्यप्रदेश से हैं।

गुरु से मिली साधना और संस्कार,उनकी गायकी में सहज ही अनुभव होते हैं।

गौतम जी की गायकी परंपरा, भक्ति और भाव का अद्भुत संगम है।

भारत के प्रमुख संगीत समारोहों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, उनकी सुरमयी प्रस्तुतियाँ,श्रोताओं को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव में ले जाती हैं।

इन्हें संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित सम्मान- ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार’,से नवाज़ा जा चुका है ।

ये मध्य प्रदेश शासन के ‘एकलव्य पुरस्कार’,

तथा ‘सुधीर फड़के युवोन्मेष पुरस्कार’ और ‘तराना सम्मान’ ,माँ शारदा सम्मान,एवं कई प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हैं तथा आकाशवाणी के ‘ए ग्रेड’ कलाकार हैं।

गौतम जी अपनी सुरमयी, भावपूर्ण और प्रभावशाली गायकी के लिए विशेष पहचान रखते हैं।

भारत के प्रमुख संगीत समारोहों – तानसेन समारोह, सप्तक संगीत महोत्सव, संकट मोचन समारोह और सवाई गंधर्व संगीतोत्सव,उस्ताद आमिर खाँ समारोह,महाराणा कुम्भा संगीत परिषद उदयपुर, पंडित मणिराम पंडित मोतीराम संगीत समारोह हैदराबाद, नालंदा यूनिवर्सिटी में स्पिक मैके द्वारा आयोजित विरासत 25, (त्रिवेणी कला संगम द्वारा आयोजित) परंपरा,से लेकर लर्नक्वेस्ट संगीत समारोह बोस्टन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उन्होंने अपने गायन का परचम देश-विदेश में लहराया है और वर्तमान में अमेरिका प्रवास के दौरान वहाँ के कई प्रतिष्ठित संगीत समारोहों और मंचों पर प्रस्तुतियां दे रहे हैं।

उनकी गायकी शास्त्रीय संगीत की गहराई और आत्मा को जीवंत कर देती है। गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेवाती घराने की समृद्ध शैली और विरासत को सहेजना,

और उसे अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करना,

इसी उद्देश्य के साथ… पंडित गौतम काले जी और उन का संगीत गुरुकुल संस्थान निरंतर कार्यरत है।उनसे सीखना और मार्गदर्शन प्राप्त करना सौभाग्य है।

जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ सर